Neha Mishra

Neha
You can reach Neha on her FB Page or her two interesting Blogs, The Solitude Addict & Rubaru Ishque Se
You can also access videos of her readings on our Videos page. Two of Neha’s poems are posted below.
वो बचपन ही सही था

ए समय,
ज़रा वो शाम उधार देना
जिस शाम तूने मेरा बचपन छीना था

हो सके तो वो सुबह भी देना
जिस सुबह स्कूल के लिए आखरी बार तैयार हुई थी

और वो रात याद है जब
सोई रात मे माँ पापा ने आ कर
सर को चूमा था
और हाथ से किताब हटा कर
टेबल पर रखा था

वो गर्मी की छुट्टी भी दे ही देना
जब भाई बेहन के साथ पूरी डोपेहर
खेली और बिन बात के झगड़ा करती थी

ए समय, ज़रा एक बार मेरा बचपन उधार में देना

बहुत कुछ करना रह गया था
पिछली बार बचपन मे
एक बार को वो उधार दे
सब शैतानी पूरी कर लू
और चुपके से तुझे बिना बताए
उस बचपने को
एक बक्से मे बंद कर लू

ये बड़ा होना बहुत मुश्किल है
हर वक़्त सोचना पड़ता है
क्या करू और क्या नही
के बीच तौलना पड़ता है
सही ग़लत
तो कभी
ग़लत और बहुत ग़लत
के बीच जूझना पड़ता है

ए समय, सुन ना
थोड़ी और मौहलत उधार मे दे दे

ये रोज़ रोज़ का ऑफीस जाना
घर आ कर खुद से पकाना
और फिर थाली मे अकेले ही खाना
ऐसा होता है बड़ा होना ये पहले क्यू नही बताया
कभी यू बड़े होने की ज़िद्द ना करती

ए समय, तोड़ा सा बचपन उधार दे दे
ये बड़े होने का खेल
अब नही होता
वो बचपन ही सही था!!!

तलाश

जनाब कुछ दिन पहले की बात है
सोचा चलो कुछ पुराने चेहरो से मुलाकात की जाए
निकल पड़े एक जाने पहचाने रास्ते पर
सोचा, बहुत लोगो से मिले थे इस राह पर
शायद आज फिर कोई मिल जाए पुराना सा
इस उम्मीद मे बहुत आगे तक निकल गये
काफी लोग टकराए रास्ते मे
सब टकरा कर मुस्कुराए भी
मगर यकीन मानीये कोई पुराना चेहरा ना मिला
हर चेहरा थोडा जाना पहचाना सा ज़रूर था
मगर कोई पुराना चेहरा ना था
हर कोई बस अंधाधुन तेज़ी मे चला जा रहा था
शायद बस मैं थी जो हौले हौले बढ़ रही थी
इस उम्मीद मे की कोई पुराना चेहरा मिल जाए
सुबह की निकली अब शाम हो चली थी
सूरज भी अब अल्विदा कहने की कगार पे था
थकि हारी मैं थोडा रुक गयी
.समझ ना आया कहा गये वो सब चेहरे
ज़मानो पहले साथ चले थे हम
आज कोई नही है
इस शाम मे मैं यहा अकेली हूँ
रास्ते पर दौड़ता हुआ हर इंसान अकेला था
हर कोई कही पह्ोचने की कोशिश मे था
कुछ पाने की होड़ मे था
यही सोचते हुए फिर चल पड़ी
की शायद अब तो एक पुराना चेहरा मिल जाए
रात होने जो आई है
मुझे भी तो आख़िर वापस जाना था कहीं
कुछ दूर चल कर
पुराना चेहरा तो नही मगर एक आईना मिला
गौर से देखा उस आईने मे
शायद उसमे ही एक पुराना चेहरा दिख जाए
कसम खुदा की,
उस शाम आईने ने भी
कोई पुराना चेहरा ना दिखाया
बस थोडा जाना पहचाना सा अक्स ज़रूर था
कुछ पुराने चेहरों की तलाश मे!

Neha’s Blogs offer you greater insights into her works.  You can reach them here: The Solitude Addict & Rubaru Ishque Se

%d bloggers like this: